राष्ट्र संघ की जंग
राष्ट्र संघ में भीड लगी है शान्ती-दूत अवधेशो की
अब वैमनस्यता खोल रही हेै,पोल सियासी भेषों की
संहार समन संसारों की ये रूश, अमेरिका मण्डी है
जर्मन और जापान, चीन भी महा - युद्व रणचण्डी है
सारी दुनिया अस्त्र-शस्त्र की होडो में ही लगी हुयी है
तहस-नहस हो दुनियां सारी इसी तोड में जगी हुयी है
संयुक्त - राष्ट्र के सभी सहोदर, उंची-उंची छोड रहे हैं
फिर भाषण की भांषा देखो,शब्दो से सिर फोड रहे हैं
आतंकवाद की परिभांषा को खुद आतंकी बोल रहे हैं
नर- भक्षी, दुनियां की रक्षा की कक्षाएं खोल रहे हैं
विश्वशान्ती अभिनेता के घर खून खराबा मचा हुआ है
हिम्मत हो तो पूछो,झगडा जग में कैसे रचा हुआ है
संयुक्त राष्ट्र भी हिन्दू,मुस्लिम, ईसा,मूसा का नाटक हेै
आतंक वाद की जल घाराओ के श्रोतों का ये फाटक है
अस्त्र-शस्त्र की इस मण्डी में हथियारों की हाट लगी है
नेता सारे मस्ती में है, बस, जनता की बाट लगी है
हम भी अपने घर के किस्से, चौराहों में खोल रहे हैं
राजनीति की औकातो को,संयुक्त राष्ट्र में बोल रहे हैं
शेखर,सूभाष और भगतसिंह के आदर्शों को ढूंढ रहे हैं
शकुनि और विभीषण बन कर,भारत माँ को मूंड रहे है
ये अस्त्र-शस्त्र, ये युध्द-पोत अब कौन बनाकर देता है
कौन रूधिर की सरिता में, संहार की नौका खेता है
अपने ही घर के मरते हैं तो बात अमन की होती है
संयुक्त राष्ट्र संहार समर ही अस्त्र - शस्त्र की खेती है
शस्त्र बेचने वालों से क्या अमन, शान्ती बच पायगी
माया के दबंग दरिन्दों से क्या वशुन्धरा रच पायेगी
बन्द करो ये नाटक सब, दुनिया को अमन बनाने को
मजहब नया इजाद करो,बस गीत शान्ती के गाने को
विश्व-शान्ती की हर भांषा में आतंकी विस्फोट भरा है
दुनियां में सरहद के झगडों से मानव ही रोज मरा है
फेसबुकों में घर का किस्सा सारी दुनियां देख रही है
कवि आग की कविताएं भी शब्द निरर्थक फेंक रही है।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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