आग
दीपावली विद्युत की लौ से जल गयी
सरस्वती का मान लक्ष्मी हर गयी
रक्षा के बन्धन में भी क्रन्दन आ रहा है
भागिनी का भाग्य नन्दन खा रहा है
आग से होली जली और आग से रोशन दीवाली
दशहरे में आग से रावण जला ये रीत काली
आग से रक्षा के बन्धन में सजी पूजा की थाली
आग है त्यौहार है ये आग है कैसी निराली
आग से ही श्रृष्टि है औेर आग से ही दृष्टि है
आग से बदरी बनी ,और आग से ही वृष्टि है
भूख में भी आग है, और प्यास में भी आग है
जिन्दगी के हर सफर की ,आस में भी आग है
धन कमाने की जमाने में गुमानी आग है
इस जगत में जिन्दगानी की रवानी आग है
सागरों और सर , सरिताओं में पानी आग है
रब ने बख्शी जो जवानी, वो जवानी आग है
दिनकरों और चाॅंद तारों में धधकती आग है
भू-कम्प से ज्वालामुखी से भू - भभकती आग है
श्रृष्टि के संचार में भी , छल, कपट ये आग है
ब्रह्माण्ड में, चारों दिशाओं में, लपट ये आग है
वाशना, उपाशना के राग में भी आग है
शासना, र्दुवाशना की ,त्रास में भी आग है
मृत्यु के पर्यन्त तक क्षण, क्षण में चलती आग है
आग के हर छन्द में जलती, मचलती आग है
आग के कारण ही तो मैं जग में जिन्दा खेलता हूॅं
मञ्च में भी आग के कारण मैं निन्दा झेलता हूॅं
आग है तो बस, जलाने का हूनर मैं जानता हूॅं
मैं आग हूॅं तो आग से ही आग को पहचानता हूॅ!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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