Monday, October 20, 2014

 
दीपावली के शुभ अवसर पर मैं अपने पाठकों का हृदय से अभिनन्दन करते हुये बहुत-बहुत बधाई देता हूं


       दीपावली  विद्युत  की  लौ से जल गयी
       सरस्वती   का  मान  लक्ष्मी  हर  गयी
       रक्षा के बन्धन मे भी क्रन्दन आ रहा है
       भागिनी  का  भाग्य  नन्दन खा रहा है
                       आग
आग से होली जली और आग से रोशन दीवाली
दशहरे  में आग  से  रावण  जला  ये रीत काली
आग से रक्षा के  बन्धन में सजी पूजा की थाली
आग  है  त्यौहार  है  ये  आग  है  कैसी निराली

आग से  ही  श्रृष्टि  है औेर आग  से  ही दृश्टि है
आग से  बदरी  बनी ,और  आग  से ही वृष्टि है
भूख में  भी आग है, और प्यास  में भी आग है
जिन्दगी के हर सफर की ,आस  में भी आग है

धन  कमाने  की  जमाने  में  गुमानी  आग है
इस जगत  में जिन्दगानी की  रवानी  आग है
सागरों और  सर ,सरिताओं में  पानी  आग है
रब  ने बख्शी जो  जवानी, वो जवानी आग है

दिनकरों और चाॅंद तारों  में  धधकती आग है
भूकम्प से ज्वालामुखी में भू,भभकती आग है
श्रृष्टि के संचार  में  भी , छल, कपट ये आग है
ब्रह्माण्ड में, चारों दिशाओं में, लपट ये आग है

वाशना, उपासना  के   राग    में  भी  आग है
शासना,  दुर्वाशना  की ,त्रास में   भी  आग है
जन्म मृत्यु के सफर के क्षण में चलती आग है
आग के  हर छन्द में जलती,मचलती आग है

आग के कारण ही तो मैं जग में जिन्दा खेलता हूॅं
मंच  में  भी  आग  के कारण मैं निन्दा झेलता हूॅं
आग है तो बस, जलाने  का  हूनर  मैं  जानता हूॅं
मैं आग हूॅं तो आग  से ही आग को पहचानता हूॅ!!!
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
                 मो09897399815
      rajendrakikalam.blogspot.com

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