Friday, October 17, 2014

    स्टार समाचार के प्राइम टाइम पर अमिताभ अग्निहोत्री की टिप्पणी पर
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                मौके की नजाकत
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है
कौम,कबीले,धर्म मजहब हैं,चीन नही जापान नही है
शिक्षा,दीक्षा और तितिक्षा,शहर गांव में भिन्न-भिन्न है
संस्कारो की छोटी-छोटी नदियों से सागर भी खिन्न है
निजी स्वार्थ में जीने,मरने वालो में स्वाभिमान नही है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

कोष-कोष भांषा के झगडे,कोष-कोष पिछडे और अगडे
विधान सभा हो या संसद हो,नेताओं के अपने रगडे
एक देश को छप्पन टुकडों में मिलकर तुम बांट रहे हो
कूडे करकट के ढेरों में भारत मां को छांट रहे हो
इतिहासों में जीने वालो का दुनिया में मान नही  है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

प्रतिष्पर्धा की जीवन रेखा,हम सब मिलकर लांघ रहे हैं
जंहा-जंहा भी हम जाते हैं, भिक्षा ही तो मांग रहे हैं
देने वाला सोच विचार कर खप्पर में कुछ डाल रहा है
दानी कहने वाला हम नंगो को मतलब से पाल रहा है
खुद मुशीबतों को न्यौता देकर,कैसे सीना तान रहे है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

बिना स्वार्थ के आज जगत में कौन कंहा बाते करता है
अहशानो के दबे बोझ से,शत्रु,मित्र घातें करता है
बच्चा-बच्चा कर्जे में है,हमको ये अहसास नही है
हम गिर्वी है,इसमे नेताओ की रूची खास नही है
कर्जा खाकर जीवन जीने मे भारत की शान नही है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

जापान गये थे,जापानी से स्वाभिमान कुछ सीखा होता
सख्तायी से देश चलाते,ये अनुभव कुछ तीखा होता
राजनीति के सभी नमूनो को अनुशाशन पाठ पढाते
एक ही सीढी है विकाश की,उस मंजिल को सभी चढाते
छोटे-छोटे दलों की हरकत,ये राष्ट्र गुणगान नही है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

कौन भ्रष्ट है,कंहा भ्रष्ट हेै,राजनीति सब जान रही है
सत्युग,द्वापर,त्रेता,कलियुग,चोरों की पहचान रही है
धर्म -कर्म   मे जीने वाले ही तो माया लूट रहे है
भारत की बन्जर धरती में नये-नये अंकुर फूट रहे हैं
जिनकी ये बुनियादी मंजिल,उनका भी सम्मान नही है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

वक्त मिला है पूरे देश की आशा तुम पर टिकी हुयी है
मुक्त करादो वशुन्धरा को,जो कर्जे में बिकी हुयी हेै
स्वाभिमान फिर से लौटाओ,जो हमने अब तक खोया है
आंशू पोंछो उन गरीब के ,राजनीति से जो रोया है
एक काफिला हो हर मजहब,ये तुगलक फरमान नही है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है

सभी राष्ट्र नतमस्तक होंगे,अपने घर की मजबूती से
शान्त स्वरों के माहौलो में , डर लगता है इस तूंंती  से
हिन्दु,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई,बस,केवल भारतवाशी हो
मन्दिर,मस्जिद,गुरूद्वारा और चर्च यंहा मथुरा,काशी हो
कवि आग की चिन्गारी में आशा है,अनुमान नही है
मोदी जी,अब ये भारत है,अब वो हिन्दुस्तान नही है
                 राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                          9897399815

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