Saturday, October 18, 2014

rajendrakikalam.blogspot.com
काला-धन
कालेधन की परिभांषा को मैं भी अब तक समझ ना पाया
कालेधन को संचित करके ,कैसे काले धन को खाया
अरबों- खरबों के घोटाले, समाचार में हम पढते हैं
ये भी एक अचम्भा देखो , मायावी कैसे बढते हैं
मठ,मन्दिर की बुनियादें भी काले धन पर टिकी हुयी हैं
ट्रस्ट बनाकर काले धन को खाने की तकनीक नयी है
एन0जी0ओ0 ही आज दलाली कालेधन की करवााता है
डोनेशन देने से काला धन सफेद क्यों हो जाता हैे
उद्योगपति,व्यवसायी भी तो काले धन से ही जीते है
काले - धन वाले नर-भक्षी खून हमारा क्यों पीते है
सत्ता और सियासी सारे काले धन से भरे पडे़ हैं
राजनीति में सभी विरोधी ,अन्दर से सब साथ खडे़ हैं
एक लंगोटी हरदम काले धन का ही गाना गाती है
अरबों-खरबों की माया क्या कपाल-भारती से आती है
ऐसा कौन दयालू दुनिया में, जो दानी कहलाता है
मठ,मन्दिर में रहने वाला कालेे - धन का ही भ्राता है
अधिकारी, चपरासी, बाबू काले धन को बाॅंट रहे हैं
सभी सियासी अपने - अपने अधिकारी को छाॅंट रहे हैं
प्रजातन्त्र में कालाधन ही मूलमन्त्र क्यों बनकर आया
काले - धन वालो ने दर-दर ठोकर खाना हमें सीखाया
कनिमोझी,कलमाडी,राजा काले - धन के कलाकार हैं
दश करोड़ चपरासी के घर , देखो कैसा चमत्कार है
अरब - खरब के बडे़ भिखारी कैसे भारत में होते हैं
मठ ,मन्दिर में इनको देखो फिर भी पैसे को रोते हैं
अपने घर में चोर चकारी माल जमा परदेशों में
भूखे , नंगे , बे - घर भारत में देखो दरवेषों में
कितनी हिम्मत है भारत में भ्रष्टाचार मचाने की
चोरों में भी होड़ लगी है क्यों इतिहास रचाने की
कालेधन के राष्ट्र-गीत से सत्ता सीढी बन जाती है
भूखी,नंगी जनता काले धन का ही गाना गाती है
कंहा गया वो कालाधन अब,मैं भी सपने देख रहा था
बाबा जी के सपनो से,अपनो में रोटी सेंक रहा था
मुझको ये अहसास हो गया कालेधन से कौन बचा हेै
कू-कर्मो के काले धन से भारत का इतिहास रचा है
राम, कृष्ण,शंकर भी काले ,काले धन की कैसी माया
कालेधन की ये परिभांषा कवि आग भी समझ ना पाया।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815


No comments:

Post a Comment