Tuesday, October 28, 2014

सियासत की विरासत
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना
मेरा जरिया सियासत है,सियासी ही मुझे कहना
पागल कौम के कचरे,मुझे नेता बनाते हैं
ये उनकी बेवकूफी है,मेरे जो गीत गाते हेैं
फिर वो हिन्दुओं की हो,या मुस्लिम की हो सैना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

ये जनमत हेै मेरी मन्जिल,जिसे तेैयार करता हूँ
मैं पागल कौम की भीडो से,हरदम प्यार करता हूँ
मुझे फिरका परस्ती के ,पागल ही तो भाते है
वतन में आग लगती है , तभी हम मुस्करातेे है
वही तो है सियासत में,सियासी का सफल होना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

समझदारी वतन में होे ,हमें फिर कौन पूछेगा
अमन ओैर चैेन हो जाये,तो हमसे कौन जूझेगा
हमी तो हैं,जो चराते हैं,भीडो के जखीरो को
सियासत का मजा देते हैे,हम पीरों,फकीरो को
मेरी मंजिल हूकूमत हेै,ये मजहब है मेरे नैना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

सियासत से ये पाकिस्तान,बंग्ला,चीन चलता है
भीडो का जखीरा भी सियासत से ही पलता है
ये भीडें ही कमा करके हमें आराम देती हैं
हमारी इस सियासत में,जमाते ही तो खेती हैं
हमारा काम होता है,इमारत को सदा ढहना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

स्कूलों में मदरसो में सियासत हम ही लाते हैं
ये हडताल,ये पुतले,फूंकाना हम ही सिखाते हैं
कब बाजार बन्द होगा इशारे हमसे होते हैं
युवा ताकत हमारी हैं,तभी तो बोझ ढोते हैं
हम सोना तपा करके,बनाते हैं खरा गहना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

कंही मन्दिर,कंही मस्जिद,के झगडे हम बनाते हैं
तभी तो कौम के पागल हमारे साथ आते हैं
हमारे मौलवी,पण्डित,यही तो काम करते हेैं
हमारे योग के साधू,जहर जनता में भरते हैं
कैसे जुल्म करना हैे औेर कैसेे जुल्म को सहना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

हमारी ही सियासत से ये हिन्दुस्तान जिन्दा है
हमें औकात मालूम है,कंहा कैसा परिन्दा है
हम पारस हैं,जो सोने को मिट्टी में मिलाते हैं
कब्रिस्तान,मरघट में,अमन की धुन सुनाते हैं
पुरूष,पिचास बनते हैं,नारी बनती है डायना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना

बचपन से सियासत का कठिन अभ्यास होता हेै
पचपन में सियासत का,वो धन्धा खास होता है
हमारी जुर्म की दुनिया,कू-कर्मो से गुजरती हेै
तभी तो ये सियासत भी सरीफों को अखरती है
इशारा आग का समझो,सियासत से बचे रहना
मुझे हिन्दू से क्या लेना,मुझे मुस्लिम से क्या लेना।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815 

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