Wednesday, October 22, 2014

 तथाकथित धर्म
वेद पुरान का छाता देखो,राम कृष्ण की गाथा देखो
भीड.भयंकर तांता देखो,धरम् करम् का खाता देखो
वक्ता कैसा बोल रहा है,धनिक कौन है तोल रहा है
कथा में किस्से खोल रहाहै,मन पागल है डोल रहा है

दीन दुखी की भीड.जमा है,सुनने वाले खूब रवां है
नर नारी का खूब संमा है फिर झगडा नहीं थमा है
देखो राम कृष्ण की बातें,एक धरम् में कितनी जातें
ये सब धन कितना हैं खाते, कैसे कटती इनकी रातें

मुल्ला के उपदेश भी देखे, धरती में क्लेष ये भी देखे
धरम् करम् के द्वेश भी देखे, कैसे हैं दरवेष भी देखे
अब तो सिर्फ ईसाई हस्ती,पैग हाथ में देखो मस्ती
मजहब कीमती कौमें सस्ती,फिर भी देखो हालत खस्ती

एक जमीं जंहा एक है,अल्लाह ईश्वर सभी नेक है
जल में कैसी खींची रेख है,करमगति का अटल लेख है
भिक्षु नंगे चलते देखे, धर्मो से मठ पलते देखे
बन में जोगी गलते देखे,खाली हाथ मसलते देखे

राधास्वामि भीड. है भारी,निरंकार की महिमा न्यारी
गुरुद्वारों में लंगर जारी, धरम् का धन्धा है लाचारी
देखो सबका एक विधाता,फिर ये मजहब क्यों भटकाता
कैसा धरम् करम् का नाता,फिर क्यों आग लगी है भ्राता

मजहब शान्त कहां होते हैं,अपने घर को क्यों खोते हैं
अब तो मुर्दे भी रोते हैं,धरम् मजहब को क्यों ढोते हैं
बैर मजहब में क्यों होता है,बन्दा घुटके क्यों रोता है
मूल्य धरम् का क्यों खोता है,सारा धन्धा ही थोता है

मठ,मन्दिर में देख चढावा,भ्रष्ट, ट्रस्ट करता है दावा
काला- धन भगवान खपायें, वैष्णो, बाला,सांई गायें
बाबा महिसासुर सा भैंसा, देख विरक्ति रूप है कैसा
सरकारों का संरक्षण है,योग,भोग कैसा भक्षण है

भगवानों की माया देखेा,चमक भक्त में काया देखो
महाकाल की छाया देखो, मुर्खो ने भरमाया देखो
हर शरीर में तत्व पांच हैं,फिर भी तन में लगी आंच है
धरम् धरा में बिछी कांच है,पडे.भरम में कहां सांच है

पशुओं को कुछ सुन्दर पाया सुन्दरता में भोली काया
नभ में देख परिन्दा छाया,सब के उपर रब की माया
अन्दर सबके एक खुदा है,फिर क्यों बन्दा जुदा जुदा है
भगवान भक्त तालाकशुदा है जिसमें ताकत वही खुदा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)

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