यौवन का दोहन
देश की ताकत युवा शक्ति को राजनीति से दूर करो
चोर, डाकुओं पर अंकुश हो कुछ ऐसा मजबूर करो
व्यभिचार के खलनायक के सपने चकनाचूर करो
भ्रष्टों को कुचलो हर पग पर हमले भी भरपूर करो
मेरे देश का नेताओं ने कैसा हाल बना डाला है
सात दशक से राजनीति ने क्या केवल डाकू पाला है
क्या राजनीति में अरबपति अय्यास निकम्मे आयेंगे
क्या फिल्मी अंग-प्रर्दशन वाले राज्य सभा सहलायेंगे
क्या प्रजातन्त्र के इस मन्दिर में डाकू तम्बू गाढेंगे
क्या चोर,उचक्के टुकडे करके अखण्ड राष्ट्र को फाडेंगे
क्या संविधान की मर्यादा को अपने हित में मोडेगे
क्या नये-नये कानून, नमूने अपने ढंग से जोडेगे
कब तक ये उपहास करेंगे भारत के परिधानों का
हम भी कब तक खून पियेंगे अपने ही अरमानों का
वोट बैंक की ताकत से बस अपना ही इतिहास लिखो
यौवन हो तो युवा शक्ति से, यौवनता आभाष दिखो
जीने की उस कला को सीखो जिससे राष्ट्र संभलता हो
मरने की भी कला को सीखो जिससे राष्ट्र दहलता हो
गुमनाम मरे, बे-मौत मरे, उसका सम्मान नही होता
जो आन-बान से मरते हैं उनकाे इतिहास नही खोता
अगर देश के यौवन में कही खून का कतरा बाकी हो
भारत माँ के हर सपूत में अगर देश की झाँकी हो
लेकर झण्डों के डण्डों को राजनीति पर वार करो
खादी कुर्ते जंहा दिखे बस फाडो टुकडे चार करो
सहन शक्ति अब बहुत हो गयी पानी उपर से बहता हेै
यूवा देश का जाग रहा है,मौन शब्द सबकुछ कहता है
भरी जवानी मौन नही है कातर है, सब देख रही है
कलमआग की जले हृदय से चिन्गारी को फेंक रही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
देश की ताकत युवा शक्ति को राजनीति से दूर करो
चोर, डाकुओं पर अंकुश हो कुछ ऐसा मजबूर करो
व्यभिचार के खलनायक के सपने चकनाचूर करो
भ्रष्टों को कुचलो हर पग पर हमले भी भरपूर करो
मेरे देश का नेताओं ने कैसा हाल बना डाला है
सात दशक से राजनीति ने क्या केवल डाकू पाला है
क्या राजनीति में अरबपति अय्यास निकम्मे आयेंगे
क्या फिल्मी अंग-प्रर्दशन वाले राज्य सभा सहलायेंगे
क्या प्रजातन्त्र के इस मन्दिर में डाकू तम्बू गाढेंगे
क्या चोर,उचक्के टुकडे करके अखण्ड राष्ट्र को फाडेंगे
क्या संविधान की मर्यादा को अपने हित में मोडेगे
क्या नये-नये कानून, नमूने अपने ढंग से जोडेगे
कब तक ये उपहास करेंगे भारत के परिधानों का
हम भी कब तक खून पियेंगे अपने ही अरमानों का
वोट बैंक की ताकत से बस अपना ही इतिहास लिखो
यौवन हो तो युवा शक्ति से, यौवनता आभाष दिखो
जीने की उस कला को सीखो जिससे राष्ट्र संभलता हो
मरने की भी कला को सीखो जिससे राष्ट्र दहलता हो
गुमनाम मरे, बे-मौत मरे, उसका सम्मान नही होता
जो आन-बान से मरते हैं उनकाे इतिहास नही खोता
अगर देश के यौवन में कही खून का कतरा बाकी हो
भारत माँ के हर सपूत में अगर देश की झाँकी हो
लेकर झण्डों के डण्डों को राजनीति पर वार करो
खादी कुर्ते जंहा दिखे बस फाडो टुकडे चार करो
सहन शक्ति अब बहुत हो गयी पानी उपर से बहता हेै
यूवा देश का जाग रहा है,मौन शब्द सबकुछ कहता है
भरी जवानी मौन नही है कातर है, सब देख रही है
कलमआग की जले हृदय से चिन्गारी को फेंक रही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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