Thursday, August 13, 2015

              आजादी की गुलामी
भ्रष्टाचारों   की   आवाजें   जब   संसद   में  उठती है
मां,बहनो की  इज्जत  चौराहों  में  खुलकर  लुटती है
कारागृह से राजनीति का रूप निखर कर कर आता है
देश  में  रहकर, देश  का  नेता, देश  लूटकर खाता है
संविधान की  गरिमा  गिर  कर  नेता  से  शर्माती है
ऐसी  आजादी   से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है

आँख  मूँद  कर  हर कामो में घूस, कमीशन खाते हैं
ऐसे  नौकर  राजनीति  में   नेता   जी   को  भाते हैं
यादवसिंह व्यभिचारी,नेताओं की किस्मत लिखते हैं
आई.ए.एस, आई.पी.एस. जैसे  बाजारों में बिकते हैं
देश की जनता , नौटंकी  अधिनायक के गुण गाती है
ऐसी  आजादी   से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है

जंहा चोर बजारी, जमाखोर को भी संरक्षण मिलता है
डाकू, चोर, लफंगो  का  ही  आत्म-समर्पण पलता है
माल मिलावट का अपनो  को अपने ही खिलवाते हों
मठ,मन्दिर में जाकर  भगवानो  को  भोग चढाते हों
जिस भारत मेंअपना  भाई  छल,बल,कपटी घाती है
ऐसी  आजादी   से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है

जो  बात  राष्ट्र  की  करने  वाले राष्ट्र बेचकर खाते हों
राष्ट्र - पर्व  पर  लालकिले से  राष्ट्र ध्वजा फहराते हों
आतंकी   और   माओवादी   राष्ट्र - द्रोह  से  नाते हों
तोड-मोड कर  राष्ट्र-भक्ति  की  परिभांषा समझाते हों
ये बाणी - भूषण, बुद्वि - बल्लभ  भारत के संघाती है
ऐसी  आजादी   से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है

जिस देश में युवा,जवानी ,सडकों में धक्के खाती हो
नेता की नालायक  पीढी, स्वाभिमान  बन जाती हो
अर्जी  -फर्जी  धन्धे  परिवारों  के  नाम से चलते हों
हर गरीब  के  संचित  धन  से  ये आवारा पलते हों
ललित मोदी की गाथा,सुषमा,वशुन्धरा  भी गाती है
ऐसी  आजादी  से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है

आश्वासन और झूठे भाषण जनता  को समझाते हों
जब जनमत उनसे पूछेगा तो,जुमला उसे बताते हों
बे-शर्मी  से  खादी  पहने ,फिर  जनता  में  जाते हों
नये-नये जुमलो  की  भांषा  पुनः भीड  में  गाते हों
झूठे,छल,बल,कपटी  नेता  को जनता भी चाहती है
ऐसी  आजादी  से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है

अखण्ड राष्ट्र  के  नेताओं  ने कितने टुकडे काट दिये
सम्प्रभुता  के  भारतवाशी, जाति-पांति में बाट दिये
सब अगडे पिछडे आरक्षण से बोट बैंक  बन जाते हैं
फिर भी नेता अखण्डराष्ट्र की शपत सदन में खाते हैं
मजबूरी  में  कवि  आग भी लिखता है, जज्बाती है
ऐसी  आजादी  से   अच्छी   हमें   गुलामी  भाती है।।
           राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                     9897399815
     rajendrakikalam.blogspot.com

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