प्याज में व्याज
मोदी भैया इस जनता को थोडी सी राहत दिलवादो
पन्द्रह लाख रूपैया छोडो हर खातो में प्याज भिजवादो
खाद्यान्न को तेरे चेले जमाखोर सब दबा रहे हैं
ये व्यवसायी हम गरीब की मांस, आंतडी चबा रहे हेैं
तेरे मंहगे सूट है भाई, कुछ सस्ते हमको सिलवादो
मोदी भैया इस जनता को थोडी सी राहत दिलवादो
डेढ सौ अब दाल की कीमत,सुनकर ही मन भर जाता है
किसी गरीब को दाम बताओ तो सुनकर ही मर जाता है
नेता सारे अब बिहार में खाज सियासी मिटा रहे हेैं
मंहगायी की धूल देश को क्यों मोदी जी चटा रहे है
थोडी सी सख्तायी करके इन चेलों को भी हिलवादो
मोदी भैया इस जनता को थोडी सी राहत दिलवादो
तुम तो परदेशी पकवानो की मस्ती ही लूट रहे हो
भारत में जब भी आते हो, लुटे - पिटे से टूट रहे हो
भाषण के जुमले सुन करके जनता जीवन काट रही है
शब्दो में कुछ स्वाद नही है,शब्द कषैले चाट रही है
चोर-चकारी करने वालो से भी तो हमको मिलवादो
मोदी भैया इस जनता को थोडी सी राहत दिलवादो
अटल बिहारी,मनमोहन अब तेरे राज में प्याज खडा है
व्यवसायी सरकार देश में,ये भी अचरज बहुत बडा है
भाषण की भांषा को सुन कर सीना छप्पन हो जाता है
मंहगायी का ख्याल करो तो छप्पन इंच ही रहजाता हेै
कमल खिलाने वालो,थोडा प्याज देश में भी खिलवादो
मोदी भैया इस जनता को थोडी सी राहत दिलवादो
नंगा-भूखा खाद्य मन्त्री, लावारिस तुम चुन कर लाये
तुमने भी तो हर भाषण में जनता को सपने पिलवाये
तुम आपस में लडो-मरो,पर प्याज कंहा है उसको ढूँढो
सारा धन बिहार मे बाँटो, जिसको चाहो उसको मूँडो
कवि आग को बस,थोडी सी राहत की घूटी,पिलवादो
मोदी भैया इस जनता को थोडी सी राहत दिलवादो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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