Thursday, August 6, 2015

                    नेता की प्रतिभा
गुण्डे, डण्डे  और  हथ-कण्डे ,प्रजातन्त्र के  गणनायक हैं
हम तुम सारे  मरे  हुये हैं, अब  तो बस ये ही  लायक हैं
बलात्कार,व्यभिचारी शिक्षण इन्हेविरासत में मिलता है
कुदरत की  दिनचर्या  देखो,लीचड  कीचड  में खिलता है

बहूबल हो  साहू  बल  हो खबरों में जिसकी कल-कल हो
रोम-रोम अपराध ग्रस्त हो, चक्षु  भाव  से बहता जल हो
धन हो जन हो,जन गण मन हो,काया से थोडा चंचल हो
पढे़ लिखे  का काम नही है,भरमाने  की  सढी  अकल हो

गली  मुहल्ले का  खतरा हो,जेब  तिजोरी  का  कतरा हो
अपराध उम्र सोलह - सतरह हो,खूनो से लतरा,पतरा हो
वैश्यागामी और  कामी  हो, अस्त्र - शस्त्र  घर में दामी हो
लूच्ची,टुच्ची  सब   खामी  हो, दूर-दूर  तक  बदनामी हो

मुर्दो   में थोडा  जिन्दा  हो,जूत  पढे़ तो  ना  शर्मिन्दा हो
उल्टा सीधा या मुन्दा हो,बस,अखवारों  में  भी निन्दा हो
हेरा   फेरी    अय्यासी   हो , तीरथ  में   मथुरा  कशी हो
उँच, नीच,  कुर्मी, पासी  हो, नैनो  में  बस  नक्कासी हो

कालेधन का भी माहिर हो,किस्सा  उसका जग जाहिर हो
अन्दर कुछ हो,कुछ बाहिर  हो,काया  से  कोढी काहिर हो
खादी  में   गाँधी  लगता  हो,  सूनामी  आँधी  लगता हो
लोहा  है, चाँदी   लगता  हो, रांड, भाण्ड, बांदी  लगता हो

नक्सलवादी   और   आतंकी,  माओवादी  सभी  यार हों
चैराहों  पर  खुल्ला  घूमें, साथ  में   गुण्डे  लगे  चार हो
शक्लें  चाहे    टेढी,  मेढी,  बस  मूंछो  में  लगी  धार हो
चरण पकडने  वाले  जन हों,इज्जत  चाहे  तार - तार हो

सम्पर्को  में  चूजे, फाइल, नगर वधु भी  संग  रखता हो
दूराचार के  सारे  गुण  हो, उल्टा,  सीधा   रस  चखता हो
राजनीति में सुन्दर-सुन्दर,महिला चुन-चुन कर लाता हो
फिल्मी दुनिया की  फुलझडियों  से  भी तो थोडा नाता हो

दुनिया  भर  के  दुर्गुण  वाले   ही   तो  नेता  कहलाते हैं
मुर्दो की  बस्ती  से ,ये  ही  जिन्न,भूत  चुनकर  आते हेैं
कु-कर्मी और  बे-शर्मो  को, मुर्दों  फिर  से चुन कर लाओ
कवि‘आग’के इन छन्दों  को पढो, शवों  से  कफन उठाओ!!
               राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
                      मो098973998
          rajendrakikalam.blogspot.com

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