संकट में सिपाही
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
सीमा का समृद्व सिपाही तृष्कार क्यों ढोता है
भीख मांगने आये थे जिनका तुमने अपमान किया
क्या यही राष्ट्र गौरव है जिसका ऐसा गुणगान किया
फौजी का अपमान नही अपमान राष्ट्र का होता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
भगत सिंह,शेखर ,सूभाष को लालकिले से गाते हो
उसी शौर्य पर चलने वालों पर लाठी बरसाते हो
शहीद हुये जो भारत पर उनकी विधवाओं से पूछो
जो मरे राष्ट्र की खातिर उनकी भटकी आहों से पूछो
राजनीति में फौजों का सम्मान यंहा भी थोथा है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
कितने युद्व लडे फौजों ने उस शौहरत को भी देखो
कैसे क्रुद्व अडे दुश्मन से वो जोहरत मुरत देखो
अपने नाती, पोतों को जो सैना में भिजवाते हैं
भरी जवानी में बच्चे जो बिना मौत मरजाते है
फौजी सरहद पर बच्चे क्यों राष्ट्र के खातिर खोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
अनुशासन पर जीने वालों को सरकारों ने मारा
देश पर मरने मिटने वालों पर फेंका क्यों अंगारा
क्यों गोली खाने वालो पर लाठी-डण्डे बरसाते हो
कैसे तुम उस लालकिले पर राष्ट्र ध्वजा फहराते हो
नेता राष्ट्र सर्मपण में क्यों राजनीति को बोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
स्वतन्त्र दिवश के अवसर पर फौजी हडतालें करते हैं
संसद में बैठे सब नेता क्यों काम ही काले करते हैं
ललितगेट का माहिर है,कोई व्यापम पापम करता हेै
क्यों प्रजातन्त्र के मन्दिर में ये भ्रष्टाचार उभरता है
प्रजातन्त्र के मन्दिर में डाकू को मिलता न्यौता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
मन की बातें बोल रहे हो कुछ तो तन की भी बोलो
अपनी जीवन शैली से फौजी का जीवन मत तोलो
अपने बच्चों को भर्ती कर भेजो उन सीमाओं पर
मिटे हुये सिन्दूर के चेहरे देखो उन मांताओं पर
उस बूढे बाप से भी पूछो जो इकलौता बेटा खोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
हम जिनके कारण सोते हैं अब उनको तो ना भडकाओ
हम जिनके कारण खाते हैं,जीवन उनका तो ना खाओ
झूठ,कपट,छल की भांषा,अब कितने दिन तुम गाओगे
जुमलो की परिभांषा क्या अब फौजों को समझाओगे
ये आग कविता लिखता है तो पाप राष्ट्र के धोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
सीमा का समृद्व सिपाही तृष्कार क्यों ढोता है
भीख मांगने आये थे जिनका तुमने अपमान किया
क्या यही राष्ट्र गौरव है जिसका ऐसा गुणगान किया
फौजी का अपमान नही अपमान राष्ट्र का होता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
भगत सिंह,शेखर ,सूभाष को लालकिले से गाते हो
उसी शौर्य पर चलने वालों पर लाठी बरसाते हो
शहीद हुये जो भारत पर उनकी विधवाओं से पूछो
जो मरे राष्ट्र की खातिर उनकी भटकी आहों से पूछो
राजनीति में फौजों का सम्मान यंहा भी थोथा है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
कितने युद्व लडे फौजों ने उस शौहरत को भी देखो
कैसे क्रुद्व अडे दुश्मन से वो जोहरत मुरत देखो
अपने नाती, पोतों को जो सैना में भिजवाते हैं
भरी जवानी में बच्चे जो बिना मौत मरजाते है
फौजी सरहद पर बच्चे क्यों राष्ट्र के खातिर खोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
अनुशासन पर जीने वालों को सरकारों ने मारा
देश पर मरने मिटने वालों पर फेंका क्यों अंगारा
क्यों गोली खाने वालो पर लाठी-डण्डे बरसाते हो
कैसे तुम उस लालकिले पर राष्ट्र ध्वजा फहराते हो
नेता राष्ट्र सर्मपण में क्यों राजनीति को बोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
स्वतन्त्र दिवश के अवसर पर फौजी हडतालें करते हैं
संसद में बैठे सब नेता क्यों काम ही काले करते हैं
ललितगेट का माहिर है,कोई व्यापम पापम करता हेै
क्यों प्रजातन्त्र के मन्दिर में ये भ्रष्टाचार उभरता है
प्रजातन्त्र के मन्दिर में डाकू को मिलता न्यौता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
मन की बातें बोल रहे हो कुछ तो तन की भी बोलो
अपनी जीवन शैली से फौजी का जीवन मत तोलो
अपने बच्चों को भर्ती कर भेजो उन सीमाओं पर
मिटे हुये सिन्दूर के चेहरे देखो उन मांताओं पर
उस बूढे बाप से भी पूछो जो इकलौता बेटा खोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है
हम जिनके कारण सोते हैं अब उनको तो ना भडकाओ
हम जिनके कारण खाते हैं,जीवन उनका तो ना खाओ
झूठ,कपट,छल की भांषा,अब कितने दिन तुम गाओगे
जुमलो की परिभांषा क्या अब फौजों को समझाओगे
ये आग कविता लिखता है तो पाप राष्ट्र के धोता है
क्यों सरकारों के आगे सरहद का फौजी रोता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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