Wednesday, August 19, 2015

   शिक्षा की समीक्षा
आज  देश  में   टीचर  हैं,  पर  गुरू  नही हैं
अन्त   दिखाई   देता   है   पर  शूरू  नही है
शिक्षा  की  बुनियाद  सियासत  तोड  रही है
भारत  को  पाश्चात्य  दिशा  में  मोड  रही है

हृदय-शून्य  मानवता  में  अब  भाव नही है
एकलव्य  तो  हैं ,पर  दिल  में  घाव नही है
द्रोणाचार्यो   से  गुरूकुल   का   मान  घटा है
भेद भाव   से  आज  राष्ट्र  में  शिशू  बंटा है

मां-बाप   की   इच्छाओं  के  ये  प्रतिफल हैं
बच्चों   में  आवारा - गर्दी   ये   क्या हल है
पूरा   संचित   जीवन   चरणों  में  अर्पण है
आज समाज  की  शिक्षा  का  कैसा दर्पण है

गली-गली   में   शिक्षा   के   उद्योग  लगे हैं
राजनीति  में   ये  व्यवसायी  आज  सगे है
जूते,  चप्पल,  कपडे,  पुस्तक   बेच  रहे हैं
आदर्श - वाद  के   कपडे,  नंगे   खैेंच  रहे हैं

भाग्य वतन  का  इस  शिक्षा से जाग रहा है?
क्यों देश  का  बच्चा  परदेशों में भाग रहा हेै
भुखमरी,  गरीबी,  बे-रोजगारी  फैल  रही है
राजनीति  तो  बस,  शिक्षा  से  खेल रही है

शिक्षा मन्त्री  को   शिक्षा   का   ज्ञान नही हेै
क्या मापदण्ड है शिक्षा  का अनुमान नही है
ये प्रजातन्त्र  की  भीडों  से  चुनकर आते हैं
शिक्षा की  बुनियाद  सियासी   क्यों खाते हैं

अब अध्यापन  से राजनीति  प्रवेष हो गया
ये गुरूकुल अब राज्यसभा  का देश हाे गया
शिक्षक  नेता  हो  जाये  तो  षडयन्त्र रचेगा
यदि नेता ,शिक्षक  हो  जाये  आदर्श बचेगा

स्कूल, मदरसे  शिक्षा   के  आयाम  खुले हैं
आदर्श   राष्ट्र  के  चौराहों  पर   खूब  धुले हैं
शिशू- निकेतन  संस्कारो   को  क्यों धोता है
बस, चलने  को  प्रमाण पहुंचना ही  होता है

हम  नैतिकता  के भ्रूण  राष्ट्र  में सडा रहे हैं
बुनियाद नही है भवन मे मंजिल चढा रहे हैं
शिक्षा   के  नव - अंकुर  से  पौधे  पनपाओ
कवि आग की लपटो को  समझो,समझाओ।।
            राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                    9897399815
      rajendrakikalam.blogspot.com    

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