Tuesday, August 11, 2015

               मैं मौन हूँ-मैं कौन हूँ ?
मैं  मोदी  हूँ  मौन  नही  हूँ  राजनीति  को  भांप रहा हूँ
मानसून में  लोकसभा की लगी  आग  को  ताप रहा हूँ
तीनो  बागी,  अनुरागी  हैं, मैं  उनको  भी  बचा  रहा हूँ
मै तो केवल  मनमोहन  की परम्परा  को  सजा रहा हूँ

अरूण  जेतली  हारे  मोहरे  वित्त  व्यवस्था  देख  रहे हैं
सभी  विरोधी  स्मृति रानी  पर  भी  कीचड  फेंक रहे हैं
सुषमारानी ललितमोदी  के  मोदक खुलकर चाट रही है
अधिवक्ता है,तर्क  सियासी  अपने  ढंग  से  छाँट रही है

शिवराज की खाज सियासी  मौन  हुआ  मैं झेल रहा हूँ
वशुन्धरा के ललित  प्रेम से  असमंजस में खेल रहा हूँ
आर.एस.एस.की प्राण पतिष्ठा में प्राणो को झोंक रहा हूँ
शिव सैना,बजरंग दलो की  दाल  सियासी  छोंक रहा हूँ

गिरते-पडते किसी  तरह  मैं रथ  सत्ता का  खींच रहा हूँ
इसी बीच परदेश गमन के अमन चमन को सींच रहा हूँ
घर  के  बूढे  मेरे  पथ  पर  शूल   सियासी  डाल  रहे हैं
हम मोदी पी.एम.बी.जे.पी.को अपने दम पर पाल रहे है

मैं  शब्दो  का  सौदागर  हूँ, शब्द  सियासी  बेच  रहा हूँ
कर्कस भाषण  की  भांषा  का  राजनीति  में  पेच रहा हूँ
मै बिहार में डी.एन.ए.का जुमला खुल कर छोड चुका हूँ
नीतीश कुमार और लालूयादव की रणनीती तोड चुका हू

अब  बिहार  की  राजनीति में,चाय पका कर ही जाउँगा
हर भाषण में चीनी, पत्ति, दूध सियासी ही  मिलवाउँगा
सत्ता  की  छलनी  में  खौला  -खौला  करके मैं छानूंगा
मैं बिहार को मोदी चाय का  नशा  पिलाकर  ही मानूंगा

राजनीति  के  सभी  विरोधी  थका-थका कर मार रहा हूँ
व्यवसायी   उद्योग  पति  को  दाँव-पेंच  से  तार  रहा हूँ
कवि आग  मैं  आज  हूकूमत  की  औकाते माप रहा हॅू
मैं  मोदी  हूँ, मौन  नही  हूँ,  राजनीति  को  भाँप रहा हूँ।।
            राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                   मो098973998
     rajendrakikalam.blogspot.com

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