भारत का भविष्य
राजनीति के इस सर्कस में सारे जोकर यार हो गये
वाणी भूषण, बुद्वि वल्लभ जंग लगे हथियार हो गये
योगी, साधू, सभी विरक्ति, माया से बेकार हो गये
हिन्दू,मुस्लिम,सारे झगडे अब पशुओं की डार हो गये
गुरूकुल और मदरसे ही अब शिक्षा की अर्थी ढोयेंगे
राजनीति की ना समझी से नेता शिक्षा को खोयेंगे
शैशवता की इस क्यारी में, बीज सियासी ही बोयेंगे
अभी तो झगडा सूरू हुआ हेै आगे देखो सब रोयेंगे
भविष्य देश का चौराहों पर झण्डे लेकर घूम रहा है
चाचा नेहरू बनकर नेता, कलियों को ही चूम रहा हेै
शिक्षक भी लावारिस बनकर नेता के संग झूम रहा है
प्रजातन्त्र के इस बीहड में कौन मुक्त, मासूम रहा हैे
वैमनस्य को टी.वी.चैनल बढा - चढा कर छोैंक रहे है
सम्पादक, प्रवक्ता दोनो बे - लगाम हैं भौक रहे हैं
छल,बल,कपटी हवन कुण्ड मे भारत माँ को झोंक रहे हेैं
इस हरकत से चिन्तन - मन्थन के मुर्दे चौंक रहे हैं
आग लगी है हर कोने में, मिलकर ईंधन डाल रहे हैं
अपने ढंग से सभी संपोले दूध पिलाकर पाल रहे हैं
विषकन्या,विषपुत्र सियासी जहर खिलाकर ढाल रहे हैं
कफन उठाकर कवि आग भी मुर्दो को खंगाल रहे हेैं।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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