धर्म और आतंक
ये कैसी शिक्षा है भाई आतंकी उदघोष हो गया
पाकिस्तानी राजनीति में अफजल गुरू भी बोश हो गया
गुरूकुल और मदरसे भी आतंकवाद को पनपायेंगे
इस शिक्षा से कौम , कबीले, मजहब ही छनकर आयेंगे
प्रेम, अहिंसा, सत्य,तथ्य की बुनियादें अवशेष हो गयी
ईसा, मूसा, राम,कृष्ण की दुनियां से तालीम खो गयी
क्या कूरान की आयत से अब फतवे ही छनकर आयेंगे
वेद, शास्त्र, गीता, रामायण हिंसा करना समझायेगे
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई धर्म, मजहब ही बन जाते हैं
मन्दिर,मस्जिद, गुरूद्वारे भी सम्प्रदाय काे ही गाते हैं
सारी कौमे अपने - अपने धर्मो को ही रगड रही हैं
सम्प्रदाय और सडे मजहब की लाशों पर ही झगड रही है
पीर मुहम्मद, ईशा, मूसा, राम, कृष्ण अब शर्मसार है
आतंकवाद और वैमनस्यता धर्मो के ये उपहार हैं
स्कूल,मदरसा,गुरूकुल, शिक्षक तालीमों को पनपाता है
विद्यालय से आज जगत में जालिम ही शिक्षित आता है
जिस देश की नई पीढियां आतंको में ढल जाती है
उस राष्ट्र में संस्कारो की बुनियादें खुद हिल जाती है
गिरते - पडते बने भवन भी ,बनने से पहले गिरते हैं
ऐसे यौवन अल्प मृत्यु में भरी जवानी में मरते है
कौम, कबीलों, मजहब वालो, हिंसा से बच्चे पालोगे?
सम्प्रदाय को मानने वालो, अमृत में अब विष डालोगे
शोध करो फिर से धर्मो का चिन्तन से अवरोधक ढूंढो
कवि आग कहता है, मानवता को ना मजहब से मूंडो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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