Sunday, February 28, 2016

           भारत की इबारत
अगर  देश   के   सारे  नेता,  वेतन,  भत्ता,  पेन्शन छोडे
उद्योगपति  भी  लाभ  कमाएं,पर चोरी  की  टेन्शन छोडे
मठ, मन्दिर  भी माया  छोडे ,केवल  राष्ट्र-भक्ति अपनाये
बचे  खुचे  माया - धारी  भी  हर गरीब   को गले लगाये
सोने  की   चिडिया  को  छोडो, घर में    हीरे  दबे  पडे हेै
राजनीति के कारण हम सब कबर में  जिन्दे आज गडे हेै

भू - माफिया  अपनी   धरती  बे-घर  को  घर-घर मे बाटे
धन , माया  के  चोर, लुटेर, निर्धन  को  भी दर-दर छाटे
खाद्यान  के  भण्डारों  को नियम  बनाकर  अमल में लाएं
जंहा जंहा जितनी  जरूरत  है, उतना  भर-भर के पहुचाएं
सम्पन्न राष्ट्र की सूची  में  भी,आज  जगत मे हमी बडे है
राजनीति  के कारण हम सब कबर में  जिन्दे आज गडे हेै

इमान  धर्म  और सच्चाई  से  केवल  भारत माँ को पकडे
कौम कबीले,धर्म,मजहब भी,मन्दिर,मस्जिद में ना अकडे
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाइ,  मानवता  बनकर दिखलाएं
सारे भारत - वाशी, बच्चे भी , भारत माँता  के  बन  जाएं
फिर देखना  खुद को खुद  में, हम दुनिया  में कहा खडे है
राजनीति के कारण हम सब  कबर में  जिन्दे आज गडे हेै

देश के टुकडे -टुकडे   करने  की  ये  हरकत अब तो छोडो
एक राष्ट्र  हो  केवल  भारत, जोड  सको   तो   ऐसा  जोडो
जांति-पांति  और भांषाओं की  सीमाओं को मिलकर पाटो
जंहा  कंही  भी  गांठ  पडी   है, गले लगा कर  गांठे काटो
होने को  सब   कुछ  सम्भव है,पर थोडा सा नियम कडे है
राजनीति के कारण हम  सब  कबर में जिन्दे आज गडे हेै

अरब - खरब  की  माया  नेताओं  की   रैली  चाट  रही है
मंहगायी,  भुखमरी   देश   में  बे - रोजगारी  बांट  रही है
फिर   उपर   से   वेतन,  भत्ते,  पेन्सन   नेता  रगड  ऱहे हैं
मंचो पर  देखो  चुनाव  के, सब   कुत्तों  जैसे   झगड रहे हैं
ऱाजनीति  के  इस  बीहड  में  हर   डाकू  के  अलग धडे हैं
राजनीति के कारण हम  सब कबर  में  जिन्दे आज गडे हेै

सोच समझ  कर   बच्चे  पैदा   करने  की  नीति अपनाओ
कामदेव  की  इज्जत  करना  सीखो,  सडको पर ना लाओ
व्यभिचार  और  बलात्कार  की  भांषा  से  भारत मरता हेेै
भ्रष्टाचारी   परिभांषा   से   स्वाभिमान  गिर  कर  डरता है
कवि  आग की  मानो, हम  तो   हर  युग में परवान चढे है
राजनीति के कारण हम सब  कबर  में  जिन्दे आज गडे हेै।।
                   राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                         मो0 9897399815
            rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment