आग
दिल्ली में जो आग लगी,अब पूरे देश मे फैल गयी
ये राजनीति है भारत की जो खेल सियासी खेल गयी
अखण्ड राष्ट्र के बच्चों में अलगाव के अंकुर फूट गये
एक बार फिर आर्यखण्ड, जयचन्द सियासी लूट गये
ना समझ जवानी सडको पर अब धूल सियासी चाटेगी
अब अखण्ड राष्ट्र को लावारिस औलाद प्यासी बांटेगी
सब आस गयी, विस्वास गया यौवन के लुटे गुनाहों से
अब भारत माँ चिल्लाती है इन लगे घाव की आहों से
ये बीज सियासत ने बोये जो देश भक्ति को चाट रहे
विद्याालय अब भगत सिह,शेखर, सूभाष को बांट रहे
क्या आशा है इस यौवन से जो लुटा भरे चौराहे में
सर्कस का जोकर खेल रहा है, राजनीति के साये में
हे भारत के जन गण मन अधिनायक हमको माफ करो
गन्द सियासी फैलायी,उस गन्द को मिलकर साफ करो
ये हिन्दू,मुस्लिम, सिक्खों की तुमने ही खोदी खाई है
ये आग धधकती तो देखो,जो तुमने ही सुलगायी है
खुदे हुये इन गढ्ढों को अब भरने का इन्तजाम करो
माफ करो विद्यालय को,अब जाकर ना बदनाम करो
इस शिक्षालय में राजनीति का जड काम-तमाम करो
शिक्षा को शिक्षा समझो ,ना शिक्षा झण्डूबाम करो
मैं लिखते-लिखते हार गया नेता के कुष्ट गुनाहों को
मैं जला रहा हू शोलों से इस राजनीति की आहों को
उन पाठयक्रमो को दूर करो जो वैमनस्य पनपाता है
अखण्डराष्ट्र की अग्नि को ये कवि आग सुलगाता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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