Monday, February 22, 2016

अहिसुष्णता
पूरे देश में आग लगी है नेताओं की आँख बन्द है
विद्यालय की राजनीति के चौराहों पर घनानन्द है
चाणक्यों के षडयन्त्रो से चन्दगुप्त भी मतिमन्द है
अहिसुष्णता प्रजातन्त्र के सुर-तालों में लय,छन्द है

राजनीति के हर योद्या के हाथो में विस्फोट पडा है
चौराहों में खद्दरधारी , नंगा नेता आज खडा है
शिक्षालय आतंकवाद की राजनीति में पडा सडा है
हर विद्यालय युवा छावनी की सैना का आज धडा है

अधिवक्ता भी न्यायव्यवस्था के मन्दिर मे नाच रहे हैं
संविधान के हर पन्ने को सभी दरिन्दे बाँच रहे हैं
न्यायाधीश भी अपराधी को मौन खडे ही जाँच रहे हैं
भीडो में गुण्डो की गिनती ,मुजरिम केवल पाँच रहे हैं

युवा पीढीयाँ आज नपुंशक होकर सर्कस खेल रही है
सात दशक से प्रजातन्त्र को जनता ही तो झेल रही है
ये शिक्षा तो गाँधी जी के आदर्शों की रेल रही है
भारत माँ आजाद कंहा है,अपराधों की जेल रही है

बुद्वि-बल्लभ, वाणी-भूषण हर चैनल पर चिल्लाते हैं
राजनीति के अनुबन्धों का सम्पादक गाना गाते हैं
हर कोने मे आग लगी है, केवल धूंआ देख रहा हूँ
कवि आग हूँ, शोले, शबनम शब्दो से ही फैंक रहा हूँ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment