हद् हेा गयी
कितने ज्ञानीध्यानी जग में फिर भी मूरख हद् हो गयी
दुनिया देखेा चांद पे चढ गयी पूरण मासी हद् हाे गयी
सूरज की गर्मी से बादल इन्द्र की पूजा हद् हो गयी
पहले एक हिमालय था घर-घर में हिम है हद् हो गयी
ईश्वर का कही ज्ञान नहीं था प्रेम बहुत था हद् हो गयी
नमाज पूजा घर-घर में फिर भी झगडा हद् हो गयी
पूरा कुटुम्ब एक घर सोया घर में चुप्पी हद् हो गयी
अब तो सब के घर न्यारे हैं जंग,क्लेश की हद् हेा गयी
ज्ञान शून्य नारी थी जग में पतिव्रता थी हद् हो गयी
आज की नारी अकड.देख लो कामदेव की हद् हो गयी
नारी का आभूषण लज्जा यति- सती की हद् हो गयी
अधनंगी नारी है जग में भरम्-गरम् है हद् हो गयी
एक बाप पन्द्रह को पाले कैसी माया हद् हेा गयी
अब पन्द्रह से बाप दुखी है कंचन काया हद् हो गयी
बिन शिक्षा के जहां एक था दरिया दिल की हद् हो गयी
घर- घर में स्कूल मदरसा ज्ञान सढ.गया हद् हो गयी
कम कपडों में सुंदरता थी घोर अचम्भा हद् हो गयी
अब तो लफडा ही कपडा है अकड.पकड का हद् हो गयी
सोने की चिडि.या था भारत देष वही है हद् हो गयी
अब तो घर-घर में माया है फिर भी नंगे हद् हो गयी
पहले हृदय केंद्र मनुश्य था ,हृदय शून्य है हद् हो गयी
अब दिमाग से दुनिया चलती जगत हाट है हद् हो गयी
ब्रह्मचारी,गृहस्थी,जंगल,जेागी भाग चार थे हद् हो गयी
अब आने से जाने तक का गृहस्थ आश्रम हद् हो गयी
जोगी जंगल में रमते थे रब की माया हद् हो गयी
अब तो मठ मन्दिर जंगल है योग, भोग में हद् हो गयी
नंगा नेता चंगी जनता क्या दुनिया थी हद् हो गयी
अब तो मायावी नेता है प्रजातन्त्र की हद् हो गयी
जिसका कोइ काम नहीं है राजयोग है हद् हो गयी
दया,प्रेम ,सत्,बोलो दुर्गति धर्म सनातन हद् हो गयी
अगर एक मर जाता था , कौम दुखी थी हद् हो गयी
अब तो दुनिया ही मरघट है ,कालचक्र की हद् हो गयी
परिचय बारुदों की भांषा जगत व्यवस्था हद् हो गयी
जगत नियन्ता खटिक कसाई चरित्रवान हैं हद् हो गयी
दुनिया सारी नरक बन गयी बात स्वर्ग की हद् हो गयी
अब भी मोक्ष धाम की बातें ज्ञान ध्यान की हद् हो गयी
हर मजहब में बात अमन की,भीड. भयंकर हद् हो गयी
जगत सड. गया मानवता से अल्लाह, ईश्वर हद् हो गयी
अब तो करम सुधारो अपने सुधर जाये तो हद् हो गयी
मुश्किल है अब प्रेम का होना हो जाये तो हद् हो गयी
संचित से वचिंत को बांटो बंट जाये तो हद् हो गयी
अब तो स्वयं संभालो दुनिया भगवानो की हद् हो गयी
द्वन्द गन्द के फन्दे काटो, कट जाये तो हद् हो गयी
मैं तो आग लगाने बैठा लग जाये तो हद् हो गयी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग )
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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