Monday, December 21, 2015

दलालों का देश
दलालों के कलालों के, तरकस, तीर भालों के
हवाला के हलालों के, करकस, चीर चालों के
बलुवे के बबालों के, बरबस बीर बालों के
मलवे के मलालों के, परबस पीर पालों के

ना खेती हेै ,ना बाडी है, दलाली मारवाडी हेै
फसल मेरी,असल उसकी,ये बिन तेल गाडी है
कंही सरकार का गल्ला,उसके बीच में दल्ला
ना छत है ना है तल्ला ,सारा खेल है खुल्ला

हर थाना दलाली है , घर जाना दलाली है
ये शर्माना दलाली हैे, भरमाना दलाली हैेे
दरिया में दलाली हैे, समन्दर में दलाली हैे
मस्जिद में दलाली हैे तो मन्दिर में दलाली है

जमीनों में भी सौेदा हेै, हर धन्धा मसौदा है
बिना अंकुर के पौधा है,कुँवा बातों में खोदा है
फसलों का फफोंदा है, ये दल्ला ही घरोंदा है
शक्लों से भी भौंदा हैे, इसी ने देश रौंदा है

ना बोरी ना बट्टा है, निखट्टू सा ये चट्टा है
तराजू है ना बट्टा है,सडक छापों का सट्टा है
कागज है ना पट्टा है,ना ही घी,दूघ, मट्ठा है
ना ईंटो का भट्टा है,बस बातों का ही रट्टा है

सियासत में दलाली है,रियासत में दलाली है
हिरासत में दलाली है,विरासत में दलाली है
किस्तों में दलाली हेै फेहरिस्तों में दलाली है
रिस्तों में दलाली है, फरिस्तों में दलाली है

दलालों के बिना हथियार के सौदे नही होते
दलालो ने कफन सैना के सरहद में सदा खोदे
दलालों से जहाजों की,खरीदें रोज होती है
धन्धो में दलालों के हमेशा मौज होती हेै

भारत को दलालों से कोई मुक्ति दिलायेगा
सख्ती से सियासत में कोई कानून लायेगा
दलालों और कलालों से ही भ्रष्टाचार बढता है
सुनकर‘आग’की लपटों का पारा रोज बढता है!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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