Sunday, December 27, 2015

दोस्त या गोस्त
इन्दिरा ने भी ऐसा धोखा भिण्डर वाले से खाया है
वही अस्त्र अब पाकिस्तानी सरकारो ने अपनाया है
भस्मासुर को पाला है तो मिटने को तैयार रहो
अगर आदमी बनना है तो प्यार कहो,बस,प्यार कहो

लालन पालन ,सर्प सपोलों का तुमने ही सिखलाया है
भारत मे आतंकवाद भी सरहद से छिपकर आया है
दुसरों की खाई खोदोगे, खुद भी उसमें गिरना होगा
नई पीढी को राजनीति के षडयन्त्रो से मरना होगा

कब से मातम मना रहे हैं अब मिलजुल कर रहना सीखो
अगर पडोसी अच्छे हो तो,कुछ तो अच्छे बनकर दीखो
कोमल कलियां मशल रहे हो राजनीति के जज्बातों से
अब क्यों औलादे काट रहे हो अपने ही कर्कस हाथों से

अभी समय है हाथ बढाओ ,उग्रवाद निपटाना है तो
देर नही है, सोचो समझो, प्रेम - पन्थ में आना है तो
कमजाेरी में अकड के रहना अपने ही घर को खाता है
दुनियां में ना समझी वाला,नजरों से भी गिर जाता हेै

तालीबानी अल्लाह - अल्लाह कह कर ही तो मार रहे हैं
क्या कूरान में छिपे हुये थे,ये भी कुछ हथियार रहे हैं
दुःख होता है एक धर्म है,फिर भी बच्चों को खाता है
किस मूंह से आतंकवाद भी,आयत अल्लाह की गाता है

बच्चे चाहे किसी मजहब के हो,खुद ही अल्लाह होते हैं
खुद अल्लाह को मारने वाले खच्चर बोझा क्यों ढोते हैं
पाकिस्तानी आवामो को मैं छन्दों से समझाता हूँ
जब-जब तुझको दुख होता है,मैं भी दुख से कहराता हूँ

अब ये जेहादी हरकत छोडो, सीमा को सीने से जोडो
पूरातत्व के इन काँटो से कोमल कलियों को मत तोडो
तुम तो मेरे ही हिस्से हो,फिर भी किस्से काट रहे हो
कवि आग की चिन्गारी को क्यों शोलों मे बाँट रहे हो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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