Thursday, December 24, 2015

सियासत से रियासत
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में
राजनीति से राम जला है राजनीति पहचान में
यति सति सीता माता भी बदनामी को झेल रही
असुर संतति लोकसभा में लोकलाज से खेल रही
सारे डाकू लगे हुये है आज सियासी शान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

हनुमान की औलादें भारत में भूखी भटक रही है
बजरंगी को बजरंगी शिव सैना दोनों खटक रही है
आज हूकूमत मन्दिर,मस्जिद के झगडो से होती है
भारत की तो आधी जनता मंहगायी से रोती है
नेताओ के छल,बल, कपटी भाषण हैं गुणगान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सभी विरोधी देश में
अगडी,पिछडी सारी कौमे मजहब के परिवेश में
बंटी पडी है डेढ अरब की भीडें सब तालाबों में
राजनीति ही घूम रही है ,सम्प्रदाय के ख्वाबों में
आतंकी बम फेंक रहे हैं, दीवाली, रमजान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

पाकिस्तान को ये जनसंघी काट रहे थे बातों से
आर.एस.एस अब भाईचारा बाँट रही जज्बातो से
कौरव,पाण्डव एक बाप का पुत्र उन्हे भी मान गये
शरणागत को प्रजातन्त्र का सूत्र सियासी जान गये
बोट बैंक से बाप दिखा है नेता को अनजान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

मंहगायी और बे-रोजगारी नेता जी सब भूल गये
ऐसा स्वाद लगा सत्ता का, अय्यासी में फूल गये
केवल जुमलो के गमलो में भूखे नंगे पाल रहे हैं
हिन्दू, मुस्लिम की लाशों में भाईचारा डाल रहे हैं
देख रहे है कफन में लिपटे, मुर्दे कबिस्तान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

कोई एेसी जगह बतादो,जंहा से भारत दिखता हो
कोई एेसी जगह बतादो,जंहा राष्ट्र ना बिकता हो
कोई नेता एेसा ढूंढो, जो व्यभिचार से मुक्त रहा हो
कोई नेता एेसा ढूंढो, ना अब तक अभियुक्त रहा हो
ये अहंकार में डूब रहे हैं सब अपने अरमान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

संसद भी तैय्यार खडी है वेतन डबल कराने में
लालाहित हैं सभी सियासी लोकतन्त्र को खाने में
वेतन, भत्ते, पेन्शन पाने को नरभक्षी साथ खडे हेैं
लोकसभा में राज्यसभा में नेताजी के अलग धडे हैं
अब मोदी माया जुटा रहे हैं,परदेशी अनुदान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

राजनीति में भारत, पाकिस्तान बराबर चलता है
दोनो मुल्को की सत्ता का प्यार इसी से पलता है
हर चुनाव में भारत पाकिस्तान विरोधी बनजाता है
काश्मीर में पाकिस्तानी,फतवा, झण्डा लहराता हेै
कवि आग अब कितना लिखे राजनीति पहचान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

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