झोपड की चौपड
मेरे बाप का क्या जाता हैे,वादे कर दो
ये वादे पूरे कब होते हैं, आधे कर दो
मोदी ने जो किये हैं पहले उनको देखो
झोपड पट्टी जाओ अपनी रोटी सेंको
सात दशक से कांग्रेस ने यही किया हेै
चोर, उचक्को ने भारत का खून पिया है
इसी बात का छोटे - मोटे दल खाते हेैं
झूठ,कपट,छल प्रजातन्त्र की औकाते हेैं
झोपड पट्टी राजनीतिक उद्योग खरा है
इतिहास गवाह है,नेता ने ये खेत चरा है
ये नंगे - भूखे राजनीति की हरियाली हेै
इस बंजर खेती के बस, नेता माली है
प्रजातन्त्र झोपड पट्टी से ही जिन्दा हेै
सत्ता पाओ, फिर तो नंगो की निन्दा है
राजनीति की नर्सरीया उत्तम बीजो की
प्रथम पाठशाला है, सरकरी लीजों की
अरविन्द केजरी,मोदी हो या राहुल भैय्या
लालू और मुलायम,ममता,ललिता मैय्या
ये झोपड पट्टी राजनीति को पनपाती है
इस गुरूकुल से नेता की पीढी आती है
केवल नेताओं की भीड जुटाने ये आते हैे
पहले मुफ्त ,अब तो ध्याडी भी पाते है
लोकतन्त्र की बुनियादों के ये पत्थर है
आंखो से ओझल है, जीवन भी बद्तर है
हर नेता नंगो पर टुकडे फेंक रहा है
प्रजातन्त्र को कवि आग ही देख रहा है
भारत में नगा ही सत्ता दिलवाता हेै
वादे करदो, मेरे बाप का क्या जाता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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